लोन डिमांड नोटिस मिलते ही क्या करें? जानिए अपने कानूनी अधिकार

अगर बैंक से लोन डिमांड नोटिस आ गया है तो घबराएं नहीं। इस लेख में जानिए SARFAESI कानून के तहत आपके कानूनी अधिकार, नोटिस का जवाब देने का सही तरीका, DRT में उपाय और घर नीलामी से बचने के कानूनी उपाय।

आज के समय में बैंक से लोन लेना आम बात हो गई है। कोई घर के लिए होम लोन लेता है, कोई व्यापार के लिए बिजनेस लोन, तो कोई निजी जरूरतों के लिए पर्सनल लोन। लेकिन जब किसी कारण से EMI समय पर नहीं भर पाते, तो बैंक की तरफ से एक पत्र आता है जिसे लोन डिमांड नोटिस कहा जाता है।

जैसे ही लोन डिमांड नोटिस हाथ में आता है, आम आदमी घबरा जाता है। मन में कई सवाल आते हैं—
क्या अब घर चला जाएगा?
क्या बैंक जबरन कब्जा कर लेगा?
क्या जेल हो सकती है?

सच्चाई यह है कि लोन डिमांड नोटिस कोई अंतिम फैसला नहीं है।
यह एक कानूनी प्रक्रिया का पहला चरण है, जिसमें कानून आपको पूरा मौका देता है। जरूरत है तो बस अपने कानूनी अधिकारों को समझने और सही समय पर सही कदम उठाने की।

लोन डिमांड नोटिस क्या होती है?

जब कोई लोन खाता लंबे समय तक बकाया रहता है और बैंक उसे NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर देता है, तब बैंक SARFAESI Act, 2002 की धारा 13(2) के तहत लोन डिमांड नोटिस जारी करता है।

इस नोटिस में सामान्यतः लिखा होता है:

  • कुल बकाया राशि
  • ब्याज और पेनल्टी
  • 60 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश
  • भुगतान न होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नोटिस सजा नहीं, बल्कि कानूनी चेतावनी है।

लोन डिमांड नोटिस मिलते ही सबसे बड़ी गलती

अधिकतर लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि:

  • नोटिस को अनदेखा कर देते हैं
  • डर के कारण बैंक से बात बंद कर देते हैं
  • यह सोच लेते हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता

यह रवैया नुकसानदायक है।
क्योंकि चुप रहने से बैंक को आगे की कार्रवाई करने का पूरा मौका मिल जाता है।

लोन डिमांड नोटिस मिलने पर क्या करें? (Step-by-Step)

Step 1: नोटिस को ध्यान से पढ़ें

सबसे पहले यह जांचें:

  • क्या बकाया राशि सही लिखी है?
  • ब्याज और चार्ज सही तरीके से जोड़े गए हैं या नहीं?
  • खाते को NPA कब घोषित किया गया?

कई मामलों में बैंक:

  • गलत ब्याज जोड़ देता है
  • RBI गाइडलाइंस का पालन नहीं करता

Step 2: 60 दिन का समय बहुत महत्वपूर्ण है

SARFAESI कानून आपको 60 दिन का समय देता है।
इसी अवधि में आप:

  • बैंक को लिखित जवाब दे सकते हैं
  • आपत्ति (Objection) उठा सकते हैं
  • सेटलमेंट की बातचीत कर सकते हैं
  • कानूनी उपाय की तैयारी कर सकते हैं

60 दिन निकलने के बाद समस्या बढ़ जाती है।

क्या लोन डिमांड नोटिस का जवाब देना जरूरी है?

हाँ, बिल्कुल।
यह आपका कानूनी अधिकार है।

आप अपने जवाब (Reply) में यह लिख सकते हैं:

  • बकाया राशि गलत है
  • बैंक ने नियमों का उल्लंघन किया है
  • खाते को गलत तरीके से NPA घोषित किया गया
  • EMI में देरी के पीछे वैध कारण हैं

कानून के अनुसार, बैंक को आपकी आपत्ति पर कारण सहित जवाब देना अनिवार्य है।

SARFAESI Act के तहत आपके कानूनी अधिकार

लोन डिमांड नोटिस मिलने पर borrower के पास ये अधिकार होते हैं:

  1. नोटिस का जवाब देने का अधिकार
  2. बैंक की गलत कार्रवाई को चुनौती देने का अधिकार
  3. DRT (Debt Recovery Tribunal) जाने का अधिकार
  4. संपत्ति नीलामी से पहले सुनवाई का अधिकार
  5. सेटलमेंट या OTS का अधिकार

👉 SARFAESI कानून केवल बैंक के पक्ष में नहीं है।

अगर बैंक आगे कार्रवाई करे तो क्या होगा?

यदि 60 दिनों में मामला हल नहीं होता, तो बैंक:

  • धारा 13(4) के तहत कार्रवाई कर सकता है
  • Symbolic Possession Notice जारी कर सकता है
  • Physical Possession लेने की कोशिश कर सकता है
  • नीलामी (Auction) की प्रक्रिया शुरू कर सकता है

लेकिन यहां भी borrower के पास कानूनी उपाय मौजूद हैं।

DRT (Debt Recovery Tribunal) क्या है?

DRT एक विशेष न्यायाधिकरण है, जहां:

  • बैंक और borrower के विवाद सुने जाते हैं
  • बैंक की गलत कार्रवाई पर Stay मिल सकता है
  • नीलामी रोकी जा सकती है

👉 जैसे ही बैंक 13(4) की कार्रवाई करता है, आप DRT में आवेदन कर सकते हैं।

क्या DRT से स्टे मिल सकता है?

👉 हाँ, मिल सकता है।

यदि यह साबित हो जाए कि:

  • बैंक ने नियमों का पालन नहीं किया
  • borrower को उचित अवसर नहीं दिया
  • NPA गलत तरीके से घोषित किया गया

तो DRT:

  • बैंक की कार्रवाई पर रोक लगा सकता है
  • लोन पुनर्गठन (Restructuring) का आदेश दे सकता है

क्या सेटलमेंट (OTS) सही विकल्प है?

हर मामला कोर्ट तक ले जाना जरूरी नहीं होता।
कई मामलों में One Time Settlement (OTS) बेहतर विकल्प होता है।

सेटलमेंट में आप:

  • ब्याज में छूट
  • पेनल्टी माफी
  • एकमुश्त भुगतान पर सहमति

कर सकते हैं।
👉 सही कानूनी सलाह लेकर किया गया सेटलमेंट समय और पैसा दोनों बचाता है।

क्या लोन डिमांड नोटिस आते ही घर नीलाम हो जाता है?

❌ नहीं।
नीलामी से पहले पूरी प्रक्रिया होती है:

  1. Demand Notice
  2. Reply / Objection
  3. Possession Notice
  4. DRT Remedy
  5. Auction

👉 हर चरण पर borrower के अधिकार सुरक्षित हैं।

वकील से सलाह कब लेनी चाहिए?

अगर:

  • बकाया रकम ज्यादा है
  • घर या दुकान दांव पर है
  • बैंक जबरदस्ती कर रहा है
  • आपको कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है

👉 तो अनुभवी Advocate से सलाह लेना बेहद जरूरी है

लोन डिमांड नोटिस डरने की चीज नहीं है, समझदारी से निपटने की चीज है।
यदि आप:

  • समय पर जवाब देते हैं
  • अपने कानूनी अधिकार जानते हैं
  • सही सलाह लेकर कदम उठाते हैं

तो:

  • आपका घर बच सकता है
  • आपका व्यापार बच सकता है
  • और मानसिक तनाव से राहत मिल सकती है

✍️ लेखक

Advocate Mohan Kumar

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